छत्तीसगढ़ में लगभग दो दशक  से हाथी एवं मानव का द्वंद अपने चरम पर है. आए दिन जंगली दंतेल हाथी के पैरों तले छत्तीसगढ़ के आदिवासी मारे जा रहे हैं. मगर चारों तरफ सन्नाटा व्याप्त है. विधानसभा हो या मंत्री अथवा जननेता कहे जाने वाले चंद लोग सब सो रहे हैं. किसी को कोई मतलब नहीं कि आम आदमी किस तरह हाथी के पैरों के नीचे कुचला जा रहा है. चारों तरफ सिर्फ औपचारिकता ही निभाई जा रही है .सच यह है कि छत्तीसगढ़ में हाथियों का उत्पात थमने का नाम नहीं ले रहा है.विगत  26 नवंबर को  छत्तीसगढ़ के जिला  महासमुंद में धान की रखवाली कर रहे दो युवको को दंतैल हाथी ने कुचलकर मौत के घाट उतार दिया . उन लोगों की घटनास्थल पर ही करूण मौत हो गई. दुःखद    बात यह है कि 25 नवंबर से छत्तीसगढ़ का विधानसभा का सत्र शुरू हो चुका है।इस महत्वपूर्ण मसले पर एक भी विधायक ने  न तो सुन्य  काल में आवाज बुलंद की न हीविधायक ने किसी ने काम रोको का नोटिस देकर सरकार का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की.छत्तीसगढ़ में मचे हाथी और मानव के द्वंद पर प्रस्तुत एक खास रिपोर्ट-

अट्ठारह लोग मारे, हाथियों ने

सिर्फ छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिला में अब तक हाथियों की हमले से 18 लोगों की जान जा चुकी है.अगर संपूर्ण छत्तीसगढ़ की बात करें  तो विगत  6 माह में  यह आंकड़ा  100 को पार कर जाता है. महासमुंद में घटित  घटना के बाद से इलाके में दहशत का माहौल है. जानकारी मिलने पर गजराज वाहन की टीम के साथ वन अमला मौके पर पहुंचकर मामले की जांच करता रहा. लोगों का जमावड़ा लगा रहा और हाथी के द्वारा मारे गए आदिवासी लोगों के शव बिना कफन के पूरी व्यवस्था का मुंह चिढ़ाते रहे. दरअसल साल सच यह है कि भूपेश सरकार ने मुआवजे को चार लाख से बढ़ाकर छह लाख तो कर दिया है परंतु छत्तीसगढ़ सरकार और वन विभाग की संवेदना खत्म हो चुकी है और मृतक के शव पर डालने के लिए उसके पास कफन तक  नहीं होता है.महासमुंद जिले के करीब 52 गांव वर्तमान में 5 सालों से हाथियों के आंतक से हजारों ग्रामीण परेशान है, लेकिन वन विभाग आज तक ग्रामीणों को इस परेशानी से छुटकारा दिला पाने में नाकाम साबित हुआ है. हाथी आये दिन फसलों को बर्बाद कर रहे है, पर लाचार ग्रामीणों का दर्द सुनने वाला कोई नहीं है. हाथी के आंतक से ग्रामीण व किसान जहां रतजगा करने को भी मजबूर है. जहां एक तरफ छत्तीसगढ़ में मानव अधिकारों का इस तरह उल्लंघन हो रहा है वहीं दूसरी तरफ वन्य प्राणी विशेष रूप से हाथी के द्वारा आए दिन लोग मारे जा रहे हैं.

संवेदना नहीं है भूपेश  सरकार में!

पूर्ववर्ती डौक्टर रमन सिंह सरकार के तीन कार्यकाल अर्थात 15 वर्षों में जैसी स्थिति थी लगभग वही स्थिति आज भी बनी हुई है छत्तीसगढ़ के आदिवासी जंगली इलाके में लगभग ढाई सौ हाथियों के दल विचरण कर रहे हैं और आए दिन लोगों की मौत हो रही है कांग्रेश की भूपेश सरकार के आने के पश्चात ऐसा मालूम होता था कि इस गंभीर मसले पर सरकार कुछ ऐसा करेगी कि त्वरित रूप से आदिवासी गरीब जन को हाथी से निजात मिलेगी मगर ऐसा नहीं हो पाया है महासमुंद की बात करें तो हाथियों ने  जिले के 52 गांव के हजारों हेक्टयेर की फसल बर्बाद कर दिया  है.  हाथी गांव में विचरण कर रहे हैं आए दिन घटनाएं  हो  रही है. जिले के वन मंडल अधिकारी मयंक पांडे  बताते हैं कि किसान खेत में धान की फसल की रखवाली करने के लिए गए थे. रात होने की वजह से किसान हाथी को देख नहीं पाए और हाथियों ने कुचल दिया, जिससे दोनों युवक की मौके पर ही मौत हो गई.

इस सब के बावजूद  छत्तीसगढ़ में सरकार कुंभकरणी निंद्रा में है जो एक बड़ी चिंता का विषय है.

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