किडनी या गुर्दा हमारे शरीर का एक प्रमुख अंग है. हमारे शरीर में दो गुर्दे होते हैं. इन गुर्दों का प्रथम कार्य रक्त में से विषाक्त पदार्थों को छानकर निकालना और रक्त को शुद्ध करने का है. दूसरा कार्य शरीर में विद्युत-अपघटक यानी इलेक्ट्रोलाइट्स के संतुलन को बनाये रखना है और तीसरा शरीर में प्रवाही और खासकर जल का संतुलन बनाये रखना है. साफ है कि शरीर में गुर्दों का बहुत ही अहम रोल होता है. स्वस्थ जीवन के लिए हमारे दिल और दिमाग के साथ-साथ किडनी का स्वस्थ रहना बेहद जरूरी है. इसमें जरा भी खराबी आने से कई अनेक रोग शरीर को जकड़ लेते हैं. आजकल लोगों की गलत जीवनशैली और आदतों की वजह से गुर्दे और उससे जुड़ी बीमारियां बहुत तेजी से बढ़ रही हैं. अल्कोहल का सेवन इसके लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार है.

गुर्दे खराब होने का सबसे पहला संकेत पेशाब के जरिए मिलता है. अगर आपको बार-बार थोड़ा-थोड़ा पेशाब आ रहा है, इसका रंग बदल गया है और साथ में जलन महसूस हो रही है तो इसका साफ मतलब है कि आपके गुर्दे ठीक से कार्य नहीं कर रहे हैं. गुर्दे खराब होने से शरीर का दूषित पानी पूरी तरीके से बाहर नहीं निकल पाता है और यह फेफड़ों में भरना शुरू हो जाता है, जिससे फेफड़ों को अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ती है और इन्सान को सांस लेने में दिक्कत होने लगती है, साथ ही सीने में भारीपन व दर्द महसूस होता है.

जब आपके गुर्दे खराब होने शुरू होते हैं तो सबसे पहले मूत्रविसर्जन में ही बदलाव नजर आता है. धीरे-धीरे आपके हाथों-पैरों में सूजन दिखने लगती है. जल के संतुलन पर काबू कम होने से आंखों के नीचे पपोटे भी सूजे हुए महसूस होते हैं. सुबह सो कर उठने के बाद आपको अपनी आंखें सूजी-सूजी लगती हैं. कई बार कुछ घंटों में यह सूजन खत्म हो जाती है और कई बार यह सूजन दिन भर बनी रह सकती है. अगर समय रहते इन लक्षणों के आधार इलाज शुरू हो जाए तो बेहतर है, वरना जैसे-जैसे किडनी अपना काम करना बंद करती है, वैसे-वैसे शरीर के कई अन्य अंग भी काम करना बंद करने लगते हैं. समय से इलाज ही बचाव है, वरना एक बार किडनी काम करना बंद कर दे तो फिर कोई इलाज संभव नहीं होता है. ऐसे में डायलिसिस की मजबूरी पूरी जिन्दगी के लिए बन जाती है. यह एक मंहगा और मुश्किल इलाज है और हरेक के बस का भी नहीं है.

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गौरतलब है कि हमारा शरीर एक किडनी के सहारे भी चल सकता है. कभी-कभी शरीर में एक किडनी खराब होने पर जल्दी पता नहीं चलता, क्योंकि शरीर के सारे जरूरी कार्य दूसरी किडनी संभाल लेती है. जब दोनों किडनियां काम करना बंद कर देती है, तभी हम इसे किडनी का फेल होना कहते हैं. इस हालत में किसी डोनर से उसकी एक किडनी लेकर डॉक्टर मरीज की एक किडनी बदल देते हैं.

गुर्दे की खराबी के शुरुआती लक्षण

अगर आपको सांस लेने में दिक्कत महसूस होने लगे तो यह गुर्दे की खराबी का संकेत हो सकता है. इसके अलावा पेशाब न आना या कम मात्रा में बार-बार आना भी गुर्दे की बीमारी इंगित करता है. पेशाब में जलन होती हो, पेशाब बदबूदार हो और उसमें झाग उठता हो, जिसके चलते आपको बार-बार फ्लश करना पड़े तो यह लक्षण गुर्दे की बीमारी का संकेत देते हैं. सीने में दर्द रहना, ध्यान केंद्रित करने में दिक्कत होना, सोने में दिक्कत होना, थकान और कमजोरी महसूस होना, अचानक से बेहोशी की अवस्था में चले जाना, लगातार उल्टी होना, आलस्य आना, भूख का ना लगना या कम लगना, पेट या पीठ में दर्द होना भी गुर्दे की खराबी के शुरुआती लक्षण हैं. यदि आप इन लक्षणों के दिखने पर इनका सही से इलाज नहीं कराएंगे तो आगे चलकर यह गंभीर बीमारी में तब्दील हो सकते हैं. इसीलिए इनमें से कोई भी लक्षण दिखता है तो किडनी स्पेशलिस्ट से तुरंत कॉन्टेक्ट करें.

प्रारम्भिक चरण के गुर्दे की बीमारी के लक्षण इंगित करना मुश्किल हो सकता है. वे अक्सर सूक्ष्म और पहचान करने में कठिन होते हैं. लेकिन आप हाथों-पैरों और चेहरे पर सूजन देखें तो लापरवाही उचित नहीं है. सूजन होना एक प्रमुख लक्षण है, अगर अचानक ही चेहरे या हाथ-पैरों में सूजन आने लगे, पेशाब कम होने लगे तो ये किडनी के बीमारी के लक्षण हैं.

इसके अलावा अगर आपका मूत्र झागदार है. मूत्र में अत्यधिक बुलबुले – विशेष रूप से वे जो दूर जाने से पहले आपको कई बार फ्लश करने की आवश्यकता होती है – मूत्र में प्रोटीन को इंगित करते हैं. मूत्र में प्रोटीन एक प्रारंभिक संकेत है कि गुर्दे के फिल्टर क्षतिग्रस्त हो गये हैं, जिससे प्रोटीन मूत्र में लीक हो रहा है. आपकी आंखों के आस-पास सूजन का आना भी इस तथ्य के कारण होता है कि आपके गुर्दे शरीर में प्रोटीन रखने के बजाय मूत्र में बड़ी मात्रा में प्रोटीन का रिसाव कर रहे हैं.

किडनी खराब होने पर आप का ब्लड प्रेशर भी असंतुलित हो जाता है. कई बार यह बहुत बढ़ जाता है तो कई बार यह बहुत कम हो जाता है. किडनी फेल होने पर आप की पीठ में बहुत जोर से दर्द होता है. इस के आलावा हड्डियों तथा जोड़ों में भी दर्द की समस्या रहती है. सिरदर्द एक बहुत बड़ी समस्या बन जाता है. इन लक्षणों के दिखते ही इलाज शुरू कर दें. जब किडनी खराब होनी शुरू होती है तो इस का इलाज संभव है परन्तु एक बार किडनी फेल हो जाने पर आप को बहुत ज्यादा मुश्किल हो सकती है.

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किडनी की बीमारी से बचने के उपाय

–  रोजाना 8-10 गिलास पानी पीएं.

– फल और कच्ची सब्जियां ज्यादा खाएं.

– अंगूर खाएं क्योंकि ये किडनी से फालतू यूरिक एसिड निकालते हैं.

– मैग्नीशियम किडनी को सही काम करने में मदद करता है, इसलिए ज्यादा मैग्नीशियम वाली चीजें जैसे कि गहरे रंग की सब्जियां खाएं.

– खाने में नमक, सोडियम और प्रोटीन की मात्रा घटा दें.

– 35 साल के बाद साल में कम-से-कम एक बार ब्लड प्रेशर और शुगर की जांच जरूर कराएं.

– ब्लड प्रेशर या डायबीटीज के लक्षण मिलने पर हर छह महीने में पेशाब और खून की जांच कराएं.

– न्यूट्रिशन से भरपूर खाना, रेग्युलर एक्सरसाइज और वजन पर कंट्रोल रखने से भी किडनी की बीमारी की आशंका को काफी कम किया जा सकता है.

किडनी के मरीज खाने में रखें ख्याल

किसी शख्स की किडनी कितना फीसदी काम कर रही है, उसी के हिसाब से उसे खाना दिया जाए तो किडनी की आगे और खराब होने से रोका जा सकता है :

  1. प्रोटीन : 1 ग्राम प्रोटीन/किलो मरीज के वजन के हिसाब से लिया जा सकता है. नॉनवेज खानेवाले 1 अंडा, 30 ग्राम मछली, 30 ग्राम चिकन और वेज लोग 30 ग्राम पनीर, 1 कप दूध, 1/2 कप दही, 30 ग्राम दाल और 30 ग्राम टोफू रोजाना ले सकते हैं.
  2. कैलरी : दिन भर में 7-10 सर्विंग कार्बोहाइड्रेट्स की ले सकते हैं. 1 सर्विंग बराबर होती है – 1 स्लाइस ब्रेड, 1/2 कप चावल या 1/2 कप पास्ता.
  3. विटामिन : दिन भर में 2 फल और 1 कप सब्जी लें.
  4. सोडियम : एक दिन में 1/4 छोटे चम्मच से ज्यादा नमक न लें. अगर खाने में नमक कम लगे तो नीबू, इलाइची, तुलसी आदि का इस्तेमाल स्वाद बढ़ाने के लिए करें. पैकेटबंद चीजें जैसे कि सॉस, आचार, चीज, चिप्स, नमकीन आदि न लें.
  5. फौसफोरस : दूध, दूध से बनी चीजें, मछली, अंडा, मीट, बीन्स, नट्स आदि फॉसफोरस से भरपूर होते हैं इसलिए इन्हें सीमित मात्रा में ही लें. डॉक्टर फॉसफोरस बाइंडर्स देते हैं, जिन्हें लेना न भूलें.
  6. कैल्शियम : दूध, दही, पनीर, टोफू, फल और सब्जियां उचित मात्रा में लें. ज्यादा कैल्शियम किडनी में पथरी का कारण बन सकता है.
  7. पोटैशियम : फल, सब्जियां, दूध, दही, मछली, अंडा, मीट में पोटैशियम काफी होता है. इनकी ज्यादा मात्रा किडनी पर बुरा असर डालती है. इसके लिए केला, संतरा, पपीता, अनार, किशमिश, भिंडी, पालक, टमाटर, मटर न लें. सेब, अंगूर, अनन्नास, तरबूज, गोभी ,खीरा , मूली, गाजर ले सकते हैं.
  8. फैट : खाना बनाने के लिए वेजिटबल या आॅलिव आॅयस का ही इस्तेमाल करें. बटर, घी और तली-भुनी चीजें न लें. फुल क्रीम दूध की जगह स्किम्ड दूध ही लें.
  9. तरल चीजें : शुरू में जब किडनी थोड़ी ही खराब होती है तब सामान्य मात्रा में तरल चीजें ली जा सकती हैं, पर जब किडनी काम करना कम कर दे तो तरल चीजों की मात्रा का ध्यान रखें. सोडा, जूस, शराब आदि न लें. किडनी की हालत देखते हुए पूरे दिन में 5-7 कप तरल चीजें ले सकते हैं.
  10. सही समय पर उचित मात्रा में जितना खाएं, पौष्टिक खाएं.

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