मूलतः हरियाणवी (रोहतक निवासी) मगर दिल्ली में पली बढ़ी प्राची तेहलान को लोग एक अभिनेत्री के तौर पर पहचानते हैं, मगर उन्होंने कभी भी अभिनेत्री बनने के बारे में नहीं सोचा था. पढ़ाई करते करते अचानक वह नेट बौल और बौस्केटबाल खिलाड़ी बन गयी.

2010 के कामनवेल्थगेम्स में भारतीय बास्केटबौल टीम की कैप्टन के रूप में विजयश्री दिलाने व 2011 के ‘साउथ एशियन बीच गेम्स’’में अपने नेतृत्व में भारतीय टीम को पहली बार गोल्ड मैडल जिताने वाली प्राची तेहलान अब अभिनेत्री के रूप में धूम मचा रही हैं. इन दिनों 29 नवंबर को प्रदर्शित होने वाली फिल्म ‘‘मामंगम’’ को लेकर चर्चा में है. मलयालम भाषा में बनी, मगर हिंदी, तमिल व तेलगू में प्रदर्शित होने वाली फिल्म ‘‘मामंगम’’ में उनकी मुख्य भूमिका ममूटी के साथ है.

अपनी पृष्ठभूमि के बारे में बताएं?

मैं मूलतः हरियाण की जाट हूं, पर मेरी परविरश दिल्ली में हुई. मेरा जन्म और पालनपोषण दिल्ली में ही हुआ. मेरी नानी रोहतक से हैं. तो आप मेरा यह लंबा कद देखकर रहे है, वह नाना नानी व मामा व ममेरे भाईयो पर है. नानी के परिवार पर गई है. मैं अपने परिवार में तीन पीढ़ियों के बाद पहली लड़की पैदा हुई थी. मेरे दादा जी व मेरे पिता जी की कोई बहन नही थी. इसलिए मेरी परवरिश कुछ ज्यादा ही प्यार से की गयी है. मेरे पिता का दिल्ली में ‘टूर्स एंड ट्रेवल्स’ का व्यापार है. मेरी मां गृहिणी है. मेरा छोटा भाई, साहिल सिविल इंजीनियर है. अभी उसने ईकौमर्स का बिजनेस शुरू किया है. हमारे पास दो कुत्ते हैं. मुंबई में मेरी मौसी रहती है और मैं उन्ही के साथ रहती हूं.

आप कभी स्पोट्रस ओमन थी. फिर अभिनेत्री बन गयीं ?

जी हां! मैंने आठ साल तक दिल्ली की तरफ से बास्केटबौल खेला है. बहुत ही कम उम्र में बौस्केटबाल खेलना शुरू कर दिया था. फिर मैंने नेटबौल दिल्ली और भारत के लिए 4 साल खेला. कामन वेल्थ गेम में भारतीय टीम की सबसे कम उम्र की कैप्टन थी, जिसने देश को पहला गोल्ड मैडल दिलाया.

माउंटफुट स्कूल, अशोक विहार दिल्ली से अपनी स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद मैंने दिल्ली विश्वविद्यालय के जीसस मैरी कौलेज से बीकौम औनर्स किया. इसी कौलेज से प्रियंका गांधी, नेहा धूपिया व दिया मिर्जा भी हैं. उसके बाद मैंने मार्केटिंग और एच आर में एमबीए किया. फिर मैंने कुछ समय के लिए नौकरी की. उसी दौरान मेरे पास टीवी सीरियल ‘‘दिया बाती और हम’’ में आरजू का किरदार निभाने का आफर आया. यह पैरेलल लीड था. मैंने इसको एक अवसर की तरह लिया. उनसे बात की. उन्होंने मुझे यहां औडीशन के लिए मुंबई बुलाया. फिर तीन दिन के अंदर मैं मुंबई रहने आ गयी. और शूटिग शुरू कर दी.

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तो आप पहले से अभिनेत्री ही बनना चाहती थी ?

जी..नहीं. ऐसा कभी नहीं सोचा था. मुझे अभी भी याद है. स्कूल में अगर कोई मुझे गाना गाने या माइक पर पढ़कर बोलने के लिए शिक्षक कहती थी, तो मेरे पसीने छूट जाते थे. मैंने कभी नहीं सोचा था कि जिंदगी में अभिनय करुंगी. मैं स्कूल में थिएटर की बजाय स्पोर्ट्स में हिस्सा लेती थी.

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आप स्पोर्ट्स में अच्छा काम कर रही थी. गोल्ड मैडल भी हासिल किया. वह सब कुछ छोड़ क्यों दिया ?

स्पोट्रस में उसके बाद करने के लिए कुछ बचा ही नहीं था. भारतीय टीम के लिए खेल चुकी थी. गोल्ड मैडल ला चुकी थी. इसके बाद स्पोट्रस कोच नहीं बनना चाहती थीं. क्योंकि कभी कोच बनने का पैशन नहीं था.

हरियाणा के बारे में कहा जाता है कि हरियाणा के लोग सरकार नौकरी के लालच में स्पोर्ट्स से जुड़ते हैं ?

एक अच्छे व सफल खिलाड़ी को ही सरकारी नौकरी मिल पाती है. यदि आप अच्छे खिलाड़ी नहीं होंगे तो सरकारी नौकरी कहां से मिलेगी ? अगर माता पिता अपने बच्चे को स्पोर्ट्स से जोड़ते हैं, तब उन्हें नहीं पता होता कि उनका बच्चा अच्छा करेगा या नहीं. बच्चे को भी उस वक्त कुछ पता नहीं होता है कि वह भविष्य में क्या करेगा? माता पिता अपने बेटे या बेटी को तभी खिलाते हैं, जब उन्हें समझ होती है कि अगर अपने बच्चे को अच्छे स्पोर्ट्स में डालता हूं, वह एक बेहतरीन खिलाड़ी बन गया, तो उसे एक अच्छी सरकारी नौकरी मिल सकती है. तो यह माता पिता का लालच होता है, न कि खिलाड़ी बनने के लिए मेहनत करने वाले का लालच होता है. माता पिता को ही पता होता है सरकारी नौकरी में कमाई, सुविधाएं व सुरक्षित जिंदगी है. इसलिए मैं कहती हूं कि हरियाणा कम से कम इतने अच्छे स्तर की सरकारी नौकरी तो अपने खिलाड़ी को दे रहा है. कम से कम सरकार मोटीवेशन कर रही है कि लोग अपने बच्चे को स्पोर्ट्स में भर्ती करें. क्योंकि उनके पास एक कैरियर अपौर्चुनिटी है. मेरे पास वह नहीं था. मैं तो लंबे कद की वजह से बिना कुछ सोचे ही खेलना शुरू कर दिया था.

तो फिर स्पोर्ट्स@खेलों में आपकी दिलचस्पी कैसे पैदा हुई थी ?

मेरे लंबे कद को देखकर मेरे कोच ने कहा कि बास्केटबौल खेलना शुरू करो. मैंने आंख मूंदकर खेलना शुरू किया.  धीरे धीरे खेल मेरा पैशन बन गया. दिल्ली के लिए खेलना शुरू किया. फिर खेलते हुए काफी आगे बढ़ गयी. एक दिन खेल को अलविदा कह कर टीवी सीरियल ‘‘दिया बाती और हम’’ हमें अभिनय करने लगी. तब से अभिनय में सक्रिय हूं.

जब आपने ‘‘दीया बाती और हम’’ में अभिनय करना स्वीकार किया, तो आपने एक्टिंग कहां से सीखी क्या प्रोसेस रहा?

दिसंबर 2016 में मैंने शुरुआत की थी. मैंने जो भी कुछ सीखा है, वह सब कुछ मैंने कैमरे के सामने काम करते हुए सीखा. मैंने अभिनय की कोई भी ट्रेनिंग नहीं ली. मैं निर्देशक की कलाकार हूं. निर्देशक की बात केा अच्छी तरह से समझ कर उसे निभाती आ रही हूं.

मगर कभी आपके अंदर डर था कि आप पढ़कर भी बोल नहीं सकती थी, वह डर व झिझक कैसे खत्म हुई ?

झिझक काम कर करके दूर हुई. मेरा डर लाइव बोलने को लेकर था. यहां तो लाइव होता नहीं है. स्टूडियो के अंदर कैमरे के सामने हम कई रीटेक कर लेते हैं. फिर मेरे अंदर कैमरे का डर कभी नही रहा. जैसे ही निर्देशक ने एक्शन कहा, मैं भूल जाती हूं कि लोग देख रहे हैं कि नहीं देख रहे हैं. उस वक्त मैं दृश्य में खे चुकी होती हूं. मुझे लगता है कि इसी से मेरे अंदर का आत्मविश्वास बलवान हुआ. मैं कोशिश करती हूं कि पिछली बार से इस बार कुछ नया व कुछ बेहतर ही करूं. एक कलाकार के तौर पर जैसे-जैसे मैं सीरियल या फिल्में कर रही हूं, वैसे वैसे मेरी अभिनय के प्रति समझ विकसित हो रही है. बड़े कलाकारों के साथ काम करके समझ में आ रहा है कि वह कैसे करते हैं, उनका थौट प्रोसेस क्याहै? क्योंकि मैं हर कलाकार से बातें बहुत करती हूं.

किस विषय पर बात करती है ?

किसी भी विषय पर. आपको पता होता है कि सामने वाले के पास आपसे अधिक अनुभव है, तो हम बात कर उससे सीखते हैं. एक दिग्गज कलाकार का अनुभव 20 साल की उम्र में मेरे अंदर नहीं हो सकता. पर मैं उनसे कुछ बातें सीख जरुर सकती हूं. मैंने ममूटी सर के साथ काम किया है.

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आपने ‘‘दिया बाती और हम’’ तथा ‘‘इक्यावन’ इन दो सीरियलों में अभिनय किया. आपके अनुभव क्या रहे ? डेली सोप में काम करने के तरीके से आप कितना सहज थी ?

सर, टीवी सीरियल में अभिनय करना मतलब गधा मजदूरी है. शोहरत व धन कमाने के लिए टीवी अच्छा माध्यम है. पर आपकी खुद की निजी जिंदगी नही रह जाती. बस सुबह उठो, स्टूडियो पहुंचकर काम करो. वही आपकी दुनिया बन जाती है. मैंने खुद को आर्थि रूप से सुदृढ़ बनाने के लिए दो डेली सोप किए. फिर जब आप लंबे समय तक लगातार काम करते हो, तो आपकी स्क्रीन प्रेजेंस अपने आप को ग्रूम करने का मौका मिलता है. इसके अलावा इन दोनों सीरियल में बहुत अच्छे किरदार थे.यह बात मेरे लिए बहुत ही ज्यादा एक्साइटमेंट थी. फिर यह दोनों ही किरदार बहुत कुछ प्राची जैसे थे.

स्पोर्ट्स में आप कैरियर बना रही थी तो फिर एमबीए की जरूरत क्यों महसूस हुई ?

मुझे शुरू से ही पढ़ाई का महत्व पता था. मेरा मानना रहा है कि वातावरण, दुनियादारी आदि की  पढ़ाई व बुद्धिमत्ता से ही आती है. अगर मैं 12वीं पास होती, तो मैं इतनी गहराई में आपसे बात नहीं कर पाती. मैं अपने आप को समझा नहीं पाती. तो मुझे लगता है कि एक पढ़े लिखे इंसान और कम पढ़े लिखे इंसान में यही अंतर है. मैं मानती हूं कि आपकी रोजमर्रा की जिंदगी में यही फर्क नजर आता है. जब किसी ने कल्चर में जाती हूं, तो बहुत जल्दी उस कल्चर में ढल जाती हैं. मुझे जल्द समझ में आ जाता है कि ऐसे ऐसे करना है. मेरी पढ़ाई मुझे बहुत मदद कर रही है और मैं शुरू से ही अपनी पढ़ाई पूरी करना चाहती थी. ग्रेजुएशन के बाद एमबीए किया, जिससे मेरी अच्छी नौकरी लग जाए. मैं नौकरी में भी बहुत बड़े पद पर काम कर रही थी. जब मुझे अवसर मिला तो मैंने खेल जगत में उच्चस्तर का काम किया. कारपोरेट जगत में शून्य से शुरु कर उच्च स्तर तक पहुंची. फिर अभिनय में शून्य से शुरू किया .आगे भगवान ने मेरे लिए क्या सोच कर रखा है वह मुझे नहीं पता.

आपके दोनों ही सीरियल हिट रहे. आपको काफी लोकप्रियता मिली. लेकिन हिंदी फिल्म क्यों नहीं मिली ?

हिंदी फिल्में मुझे काफी औफर हुई, पर हिंदी में मैं तब काम करना चाहती थी, जब मेरी सोच के अनुरूप बड़े स्तर की फिल्म में काम करने का अवसर मिले. मैं नहीं जानती कि ऐसा अवसर आएगा या नही. पर जब होगा तो मैं प्राउड फील करके उस प्रोजेक्ट का हिस्सा बनूंगी.

पर पिछले 2 सालों में काफी चीजें बदल भी चुकी हैं. अब भाषा बहुत मायने नही रखती ?

जी हां काफी कुछ बदल चुका है. पर मेरे लिए सब कुछ एक बराबर है. मैं हिंदी में पलीबढ़ी हूं हिंदी मेरी भाषा है, इसलिए मैं हिंदी फिल्म भी करना चाहूंगी, पर मैं तभी करूंगी जब मेरे मनमाफिक फिल्म मिलेगी.

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आपकी पंजाबी फिल्म कौन सी थी ?

मैंने पंजाबी में अर्जुन सहित दो फिल्में की हैं. मैं प्रिविलेज बैकग्राउंड से नहीं हूं. स्टार किड नहीं हूं. मैं कोई ऐसी इंसान भी नहीं हूं कि मैं एक्टर बनना चाहती थी. पर मैं अच्छी एक्ट्रेस हूं. मुझे पता था कि मुझे अपने आपको ग्रूम करना पड़ेगा. वह मैं लगातार करती आ रही हूं.

ममूटी संग मलयालम फिल्म ‘‘मामंगम’’  कैसे मिली आपको ?

औडीशन देकर मिली. यह मलयालम व हिंदी सहित पांच भाषाओं में है.

सीरियल ‘‘इक्यावन’’ बीच में बंद हो गया तो यह भी आपके लिए फायदा था ?

सीरियल ‘‘दीया बाती और हम’’ खत्म होने से हले पंजाबी फिल्म ‘अर्जुन’ मिली. इसके रिलीज से पहले मैं ‘बाइलौज’की शूटिंग कर रही थी. जब बाइलौज रिलीज हुई तब मैं इक्यावन की शूटिंग कर रही थी. इसकी शूटिंग खत्म होने से पहले ही ‘मामंगम’ मिल गयी थी.

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फिल्म ‘‘मामंगम’’ करने की मुख्य वजह क्या रही ?

फिल्म ‘‘मामंगम’’ के किरदार ने मुझे इस फिल्म को करने के लिए उत्साहित किया. यह अति सशक्त किरदार है. मुझे बताया गया था कि इस फिल्म में मेरे किरदार का लुक फिल्म ‘‘डर्टी पिक्चर्स’ में जो लुक विद्या बालन का था, वह होगा. उसी तरह के थोड़े से रिलीविंग कपड़े हैं. यह सुनकर मैं अंदर से घबरा भी गयी थी कि क्या मैं इस किरदार को निभा पाउंगी. फिल्म बहुत बड़े बजट की है. ममूटी सर के साथ काम करनाथा. तो मेरे दिमाग सिर्फ यही चल रहा था कि क्या मैं अपने किरदार के साथ न्याय कर पाउंगी. पर फिल्म के निर्देशक व निर्माता को यकीन था कि मैं कर पाउंगी. फिल्म के निर्माता का परिवार मेरे पर सीरियल ‘‘इक्यावन’’ का प्रशंसक था. वह मेरी अभिनय क्षमता से वाकिफ थे.

आपको किस तरह की तैयारी करने की जरुरत पड़ी ?

सबसे पहले तो हमने हर दिन दो घंटे भाषा के उच्चारण और दो घंटे नृत्य की ट्रेनिंग ली. मैंने मोहिनी अट्टम नृत्य सीखा. मैंने मलयालम भाषा सीखी. त्यागराजन सर ने मुझे एक्शन की टे्निंग दी. 76 वर्षीय त्यागराजन सर अब तक दो हजार से अधिक फिल्मों में एक्शन डायरेक्टर के रूप में काम कर चुके हैं. वही हमारी फिल्म ‘‘मामंगम’’ के एक्शन डायरक्टर भी हैं. उनके साथ काम करके बहुत मजा आया. उनके अंदर की एनर्जी तो कमाल की है. मैंने तलवार बाजी सीखी.

71 वर्ष के ममूटी सर में भी काम करने की एनर्जी कमाल की है. उनका व्यक्तित्व हर किसी के लिए प्रेरणा का स्रोत है. 20 अक्टूबर को गाने का रिलीज था. ममूटी सर ने स्टेज पर बुलाया. मैं खुशी की वजह से बोल नहीं पायी. इस फिल्म को करने में दो वर्ष का समय लगा

फिल्म के अपने किरदार को लेकर क्या कहेंगी ?

-मैने इसमें उन्नी मां का किरदार निभाया है, जो कि परफामर,डांसर और देवदासी है. इसी के साथ वह योद्धा भी है. मेरे सीन काफी परफार्मेंस वाले है. नदी के किनारे होने वाने मेले की कहानी है.

ममूटी और आपके किरदार कहानी में कैसे जुड़े हुए हैं ?

वह उन्नी मां के मेंशन में रूप बदलकर आते हैं, पर उन्होंने दूसरों के लिए रूप बदला हुआ है. जबकि उन्नीमां जानती है कि वह महान योद्धा है. इस फिल्म में ममूटी सर के कई भेष हैं. वह कई तरह के रूप में नजर आएंगे. यह फिल्म अनसंग हीरोज ‘चावेरा’ की गाथा है. पर महिला किरदारों में मुख्य किरदार मेरा यानी कि उन्नीमां है. उन्नी मां काफी स्ट्राग है.

फिल्म में आपके साथ कई महारथी पुरूष व महिला कलाकार हैं. उनके बीच आपकी उपस्थिति कहीं गुम तो नहीं हो जाएगी ?

पूरी फिल्म में कहानी के स्तर पर मेरा किरदार ही अहम है. उन्नी मां के किरदार की लंबाई भी सबसे ज्यादा है. जब सारे ‘चावेरा’ उन्नी मां  के मेंशन में आ जाते हैं, तो वह उन्हें बचाने का प्रयास करती है. जबकि मेरे मेंशन में उस वक्त खलनायक भी मौजूद है. मगर उन्नी मां अति बुद्धिमान देवदासी है. उसे पता है कि क्या हो रहा है. उसे पता है कि कौन सही व कौन गलत है. वह चावेरा को बचाने के लिए दूसरों का माइंड डायवोर्ट करती है.

किस तरह के एक्शन आपने किए हैं ?

मुझे क्रेन पर भी टंगा गया. मैंने वजनदार तलवारों के साथ युद्ध किया है. भागदौड़ भी की. इसमें मैं साड़ी पहने, मांग टीका लगाए, एक नारी के लुक के साथ तलवारबाजी व अन्य एक्शन करते हुए नजर आउंगी.

आपने खुद इस फिल्म को लेकर कोई शेाधकार्य किया था ?

मैंने अपनी तरफ से इस संबंध में काफी जानकारी हासिल की थी. यह इतिहास का ऐसा अध्याय है,जिसके बारे में लोग ज्यादा नहीं जानते हैं. 18 वी सदी में राजा नदी किनारे एक फेटिवल रखता था और वह घोषणा करता था कि कौन उसे तलवार बाजी में चोट पहुंचाएगा. फिर सबसे छोटा चावेरा यानी कि छोटा बच्चा उसे चोट पहुंचाता था. फिर पूरी कहानी खुलती है. इसमें बदले की कहानी है. चावेरा को राजा से बदला लेना है.

ममूटी से पहली मुलाकात कैसी थी ?

पहली मुलाकात सेट पर ही हुई थी और बहुत ही अच्छी रही थी. ममूटी सर ने पहली बार कद में सबसे बड़ी हीराईन यानी कि मेरे साथ काम किया. उनका व्यवहार बहुत अच्छा रहा. मैंने उनसे कई तरह के सवाल किए. मैंने उनकी यात्रा, समय के साथ किस तरह के बदलाव आए, को लेकर हमने उनसे काफी बातें की. उन्होंने बताया कि समय के साथ चीजें आसान नही बल्कि कठिन होती गयीं. क्योंकि स्टारडम को भी मेंटेन करना था, नई तकनीक के साथ तालमेल भी बिठाना था. अपने समकालीन हीरो के साथ साथ नई पीढ़ी के हीरो के साथ भी प्रतिस्पर्धा करनी पड़ रही है. मैंने उनसे बातें करके बहुत कुछ सीखा और उससे मेरे जीवन व करियर पर काफी प्रभाव पड़ा. वह उच्च शिक्षित हैं. वकील हैं. शिक्षा के स्तर पर हम दोनों काफी उच्च शिक्षित हैं. बुद्धिमत्ता के स्तर पर उनसे काफी कुछ सीखने को मिला. हमने उनसे हिंदी व अंग्रेजी में बातें की. सेट पर वह अक्सर सलाह दिया करते थे.

फिल्म की शूटिंग के अनुभव क्या रहे ?

कोचीन में शूटिंग करने के अनुभव बहुत अच्छे रहे.मुझे कोचीन की प्राकृतिक संुदरता ने अपना बना लिया. वहां पर हरियाली बहुत है. वहां का भोजन बहुत स्वादिष्ट है. मैंने मलयालम के कुछ शब्द सीखे.शूटिंग भी रीयल सेट पर हुई. दूसरी आने वाली फिल्में कौन सी हैं ?

एक तेलगू फिल्म ‘त्रिशंकु’की है. इस साइंस फिक्शन फिल्म में मेरे किरदार का नाम है- नक्षत्र. बहुत पयारा किरदार है. मैं इसमें एक वैज्ञानिक बनी हूं.

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कोर्ई ऐसा किरदार जो करना चाहती हों ?

मैं एक रोमांटिक किरदार व रोमांटिक फिल्म में काम करना चाहती हूं. एक पूरी एक्शन फिल्म करना चाहती हूं.

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